Oskar Schindler standing (second from right) with some of the people he rescued.

ऑस्कर शिंडलर

ऑस्कर शिंडलर, होलोकॉस्ट के दौरान यहूदियों को बचाने के लिए जाने जाने वाले प्रसिद्ध व्यक्तियों में से एक हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, शिंडलर एक फैक्ट्री चलाते थे जिसमें क्राकोव के यहूदी बस्ती से यहूदी बंधुआ मजदूर काम करते थे। यहूदियों के खिलाफ नाज़ियों की क्रूरता और हिंसा को देखने के बाद, शिंडलर ने जितने हो सकें उतने यहूदी बंधुआ मजदूरों की रक्षा करने के फैसला लिया।

मुख्य तथ्य

  • 1

    ऑस्कर शिंडलर एक अवसरवादी थे, एक जर्मन जासूस थे, और नाज़ी पार्टी के सदस्य थे। वह 1939 में अमीर बनने की चाह के साथ जर्मन द्वारा अधिग्रहित क्राकोव में आए थे।

  • 2

    शिंडलर ने 1,000 से भी अधिक यहूदियों को होलोकॉस्ट से बचकर निकलने में मदद की।

  • 3

    स्टीवन स्पीलबर्ग की ऑस्कर विजेता फिल्म Schindler’s List (1993) ने ऑस्कर शिंडलर का नाम घर-घर में पहुंचा दिया।

होलोकॉस्ट के प्रति गैर-यहूदी लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग थीं और कई कारकों पर निर्भर करती थीं। अधिकांश व्यक्ति डर, स्वार्थ, लालच, यहूदी विरोधी विचारधारा, और राजनीतिक या वैचारिक मान्यताओं के कारण यहूदियों की मदद नहीं करना चाहते थे। बाकी लोगों ने धार्मिक या नैतिक विश्वास के कारण या व्यक्तिगत संबंधों की गहराई के आधार पर मदद करना चुना। यह लेख ऑस्कर शिंडलर के बारे में है, जो नाज़ी पार्टी के सदस्य थे और जिन्होंने अंततः यहूदियों को बचाने में मदद की।

परिचय

ऑस्कर शिंडलर (1908–1974) होलोकॉस्ट के दौरान यहूदियों के सबसे प्रसिद्ध बचावकर्ताओं में से एक हैं। उन्होंने 1,000 से अधिक यहूदी लोगों को बचकर निकलने में मदद की। लेकिन कई मायनों में, शिंडलर का यहूदी रक्षक बनना उम्मीद से परे था।

होलोकॉस्ट के दौरान, लोगों ने कई वजहों से यहूदियों की मदद करना चुना। कई बचावकर्ताओं के लिए मदद करने का कारण उनके धार्मिक विश्वास या नैतिक और आचारिक सिद्धांत थे। लेकिन ऑस्कर शिंडलर धार्मिक नहीं थे। उनकी जीवनी में कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि वे कोई नैतिक मूल्यों वाले इंसान थे। वे एक लालची अवसरवादी, जर्मन जासूस और नाज़ी पार्टी के सदस्य थे। शादी-शुदा होने के बावजूद उनके कई प्रेम संबंध थे। उन्होंने बार-बार अपने पैसों का ठीक से प्रबंधन नहीं किया और ऋण यानी लोन चुकाने में असफल रहे। शिंडलर 31 साल के थे जब वे अमीर बनने के इरादे से जर्मन-अधिग्रहण वाले पोलैंड के क्राकोव आए।

क्राकोव में अपने वर्षों के दौरान, शिंडलर में धीरे-धीरे बदलाव आया। आखिरकार, उन्होंने यहूदियों की मदद करने के लिए अपनी नई संपत्ति और प्रभावशाली स्थिति का उपयोग करने का निर्णय लिया।

शिंडलर के चरित्र और उनके काम के बीच का स्पष्ट अंतर ही कई कारणों में से एक है कि बहुत से लोग शिंडलर में रुचि रखते हैं।

ऑस्कर शिंडलर: पृष्ठभूमि

ऑस्कर शिंडलर का जन्म 28 अप्रैल 1908 को ऑस्ट्रिया-हंगरी के ज़्विटाऊ (वर्तमान में स्वितवी, चेकिया) में हुआ था। जब प्रथम विश्व युद्ध के अंत में ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य समाप्त हो गया था, तब शिंडलर नवस्थापित चेकोस्लोवाकिया के नागरिक बने। शिंडलर जातीय रूप से जर्मन थे। इसका मतलब यह हुआ कि शिंडलर जर्मन भाषा बोलते थे और खुद को जर्मन मानते थे।

1928 में, शिंडलर ने एमिली पेल्ज्ल के साथ शादी की। 1920 के दशक के अंत और 1930 के दशक की शुरुआत में, उन्होंने अनेक प्रकार की नौकरियाँ कीं। दूसरे पुरुष चेकोस्लोवाक नागरिकों की तरह, शिंडलर ने सेना में एक संक्षिप्त, अनिवार्य अवधि में काम किया था।

नाज़ी शिंडलर

भले ही शिंडलर 1930 के दशक में नाजी जर्मनी में नहीं रहते थे, नाज़ी आंदोलन में उनकी भागीदारी 1930 के दशक के मध्य से ही है। उस समय, चेकोस्लोवाकिया में रह रहे जातीय जर्मनों के बीच नाजी समर्थन बढ़ रहा था। 1935 में, शिंडलर कोनराड हेनलीन की सुडेटेन जर्मन पार्टी (Sudetendeutsche Partei) में शामिल हुए। लेकिन नाज़ी जर्मनी के साथ शिंडलर की भागीदारी इस राजनीतिक पार्टी में उनकी सदस्यता से कहीं ज्यादा थी।

1936 आते-आते, शिंडलर नाजी जर्मनी के लिए जासूस के रूप में काम कर रहे थे। वे जर्मन सेना के Abwehr नामक इंटेलिजेंस ऑफिस के एजेंट थे। जुलाई 1938 में चेकोस्लोवाक पुलिस ने उन्हे इन देशद्रोही गतिविधियों के लिए जेल में डाल दिया। शिंडलर, हालांकि, अपने अपराधों के लिए आगे के परिणामों से बच गए। उनकी गिरफ्तारी के बाद, नाजी जर्मनी ने तुरंत म्यूनिख समझौते के तहत सूडेटनलैंड (जो चेकोस्लोवाकिया का मुख्य रूप से जर्मन भाषी क्षेत्र था) को अपने में मिला लिया। परिणामस्वरूप, शिंडलर को अक्टूबर 1938 में जेल से रिहा कर दिया गया। उन्होंने तुरंत नाज़ी पार्टी में सदस्यता के लिए आवेदन किया। फरवरी 1939 में, उन्हें अस्थायी सदस्यता मिली।

रिहाई के बाद, शिंडलर ने अब्वेहर (Abwehr) के लिए काम करना जारी रखा। उन्होंने चेकोस्लोवाकिया और पोलैंड के प्रति नाजी जर्मनी की क्षेत्रीय आक्रामकता का समर्थन किया। मार्च 1939 में, नाज़ी जर्मनी ने चेक प्रदेशों पर आक्रमण किया और उनका अधिग्रहण कर लिया। और, नाज़ियों ने इन्हें बोहेमिया और मोराविया के संरक्षक के रूप में शासित किया। इसके बाद, 1 सितंबर, 1939 को नाज़ी जर्मनी ने पोलैंड पर हमला किया, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई।

अधिकृत पोलैंड में यहूदी स्वामित्व वाले व्यवसायों का शिंडलर का अधिग्रहण

Entrance to Oskar Schindler's enamel works in Zablocie, a suburb of Krakow.

क्राकोव के उपनगर ज़ब्लोसी में ऑस्कर शिंडलर के तामचीनी कारखाने के प्रवेश द्वार का दृश्य। पोलैंड, 1943-1944।

क्रेडिट:
  • USHMM, courtesy of Leopold Page Photographic Collection
  • US Holocaust Memorial Museum

जर्मनी द्वारा पोलैंड पर आक्रमण और कब्जे के बाद, शिंडलर, कब्जे में लिए गए क्राकोव चले गए। उस समय, वे तब भी एक इंटेलिजेंस ऐसेट के रूप में अब्वेहर के लिए काम कर रहे थे, लेकिन उनका असाइनमेंट क्या था यह स्पष्ट नहीं है।

क्राकोव में, शिंडलर युद्ध से लाभ कमाने वाले बन गए। नाजी जर्मन अधिकारियों ने यहूदी और गैर-यहूदी दोनों पोलिश लोगों की निजी संपत्ति जल्दी ही जब्त करना शुरू कर दिया था। शिंडलर ने भी इस व्यापक लूट के कार्य में अपनी भागीदारी निभाई। उन्होंने कई जब्त किए गए व्यवसायों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया, इस उम्मीद में कि वे उनसे खूब पैसा कमा सके।

विशेष रूप से, शिंडलर ने एक यहूदी स्वामित्व वाली तामचीनी बर्तन बनाने वाली कंपनी, रेकोर्ड लिमिटेड को पहले लीज़ पर लिया और बाद में ख़रीद लिया। 1939 की शरद ऋतु में शिंडलर द्वारा रेकॉर्ड लिमिटेड का अधिग्रहण आधिकारिक जर्मन ज़ब्ती प्रक्रिया के तहत किया गया था।

रेकॉर्ड लिमिटेड के फैक्ट्री में तामचीनी के बर्तन और पैन बनाए जाते थे। शिंडलर ने व्यवसाय का नाम बदलकर Deutsche Emailwarenfabrik (German Enamelware Factory, या DEF) कर दिया। फैक्ट्री को अक्सर "एमालिया" ("तामचीनी" के लिए पोलिश शब्द) कहा जाता था। शिंडलर ने क्राकोव में दूसरे दो व्यवसाय भी करते थे, जिनमें से कम से कम एक उन्होंने यहूदी मालिकों से हड़पा था।

शिंडलर कोई खास अच्छे व्यापारी नहीं थे। वे एमालिया के संचालन के लिए कुछ पूर्व मालिकों, खासकर अब्राहम बैंकियर पर निर्भर थे। बैंकियर, जो यहूदी था, रेकॉर्ड लिमिटेड के सह-मालिक थे और युद्ध से पहले फैक्ट्री का कार्यभार संभालते थे।

शिंडलर की एमालिया फैक्ट्री में यहूदी बंधुआ मजदूर, 19401943

ऑस्कर शिंडलर ने जर्मन अधिकारियों द्वारा कब्जा किए गए पोलैंड में बनाई गई शोषणकारी श्रम प्रणाली का पूरी तरह से लाभ उठाया।

शुरुआत में, शिंडलर की फैक्ट्री के अधिकांश श्रमिक गैर-यहूदी पोलिश थे। उन्होंने सिर्फ बैंकियर और कुछ अन्य यहूदी मैनेजर नियुक्त किए थे। 1941 या 1942 के बीच ही, शिंडलर ने क्राकोव यहूदी बस्ती के यहूदी बंधुआ मजदूरों को एमालिया कारखाने में काम पर रखना शुरू किया।

शिंडलर ने बंधुआ यहूदी मजदूरों को काम पर रखना इसलिए चुना क्योंकि इन मजदूरों को काम देना गैर यहूदी पोलिश श्रमिकों को भुगतान करने से सस्ता था। जर्मन-अधिकृत पोलैंड में, शिंडलर जैसे फैक्ट्री मालिक आमतौर पर यहूदी बंधुआ मजदूरों को उनके काम के लिए पैसे नहीं देते थे। इसके बदले, वे एसएस को दैनिक किराया फीस देते थे।

फैक्ट्री मालिकों को यहूदी जबरन मजदूरों के साथ दुर्व्यवहार करने और ज्यादा काम करवाने की पूरी छूट थी। लेकिन जीवित बचकर निकले लोगों के बयानों से पता चलता हैं कि शिंडलर ने एमालिया में अपने मजदूरों के साथ अच्छा व्यवहार किया।

शिंडलर का जून 1942 में निर्वासन कार्रवाई में हस्तक्षेप

जर्मनों द्वारा यहूदियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार और हत्या ने शिंडलर और उनके कारखाने को सीधे प्रभावित किया। 1942 की गर्मियों में, जर्मन अधिकारियों ने क्राकोव यहूदी बस्ती से हजारों यहूदियों को बेल्ज़ेक हत्या केंद्र में निर्वासित करना शुरू किया। जून में, अब्राहम बैंकियर सहित एमालिया के चौदह यहूदी बंधुआ मजदूरों को निर्वासन के लिए जमा किया गया। शिंडलर ने उन्हें निर्वासन से बचाने के लिए खुद इसमें हस्तक्षेप किया। यह साफ है कि उन्हें फैक्ट्री चलाने के लिए उन मजदूरों की जरूरत थी। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उस समय शिंडलर को ट्रेन के गंतव्य के बारे में या बेल्ज़ेक हत्या केंद्र के बारे में पता था या नहीं। उनकी नियत कुछ भी हो, शिंडलर के हस्तक्षेप से निश्चित रूप से उनकी बाल-बाल जान बच गई।

शिंडलर द्वारा यहूदी बचाव समूह के साथ संपर्क

क्राकोव में यहूदी कैदियों की मदद करने की अपनी कोशिशों के अलावा, शिंडलर ने एक व्यापक यहूदी सहायता नेटवर्क के साथ भी संबंध स्थापित किए।

1942 के अंत में, शिंडलर ने राहत और बचाव समिति के साथ काम करना शुरू किया। यह बुडापेस्ट, हंगरी में स्थित एक यहूदी सहायता संस्था थी। हंगरी के यहूदियों द्वारा इसका नेतृत्व किया गया था, जिनमें जोएल ब्रांड और रुडोल्फ कास्ज़टनर शामिल थे। शिंडलर ने सूचना वाहक यानी कूरियर के रूप में काम किया। उन्होंने यहूदी कैदियों को पैसे, पत्र, और जानकारी देने का काम करके उनकी मदद की।

नवंबर 1943 में, शिंडलर बुडापेस्ट गए। वहां उन्होंने समिति को जर्मन-अधिकृत पोलैंड में यहूदियों की सामूहिक हत्या के बारे में जानकारी दी।

क्राकोव यहूदी बस्ती के विनाश के दौरान शिंडलर द्वारा यहूदियों की सुरक्षा, मार्च 1943

1943 में शिंडलर यहूदियों की मदद करने के लिए और भी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुआ। उस मार्च, जर्मनों ने क्राकोव यहूदी बस्ती को भंग कर दिया और वहाँ के कई बचे हुए निवासियों की हत्या कर दी। यहूदी बस्ती के परिसमापन के समय, शिंडलर ने अपने यहूदी मजदूरों को रात भर फैक्ट्री में रुकने का निर्देश देकर उनकी सुरक्षा की। नतीजतन, वे यहूदी मजदूर क्रूर और घातक कार्रवाई से बच गए। इसके बाद, जो कैदी एमालिया में काम करते थे उन्हें यहूदी बस्ती से पास के प्लाज़ोव बंधुआ मजदूर कैंप में भेजा गया।

मैं जो कर रहा हूं उसका उद्देश्य और मेरा आंतरिक परिवर्तन इसलिए है क्योंकि मैंने रोजाना यहूदियों द्वारा अनुभव किए जानेवाले असहनीय पीड़ा को देखा है अधिकृत क्षेत्रों के... दर्दनाक अधिग्रहण देखें हैं

—ऑस्कर शिंडलर

प्लास्ज़ोव के यहूदी कैदियों के लिए शरण स्थल के रूप में एमालिया, 19431944

क्राकोव यहूदी बस्ती के समापन के बाद, शिंडलर ने एमालिया में यहूदी बंधुआ मजदूरों से काम कराना जारी रखा। शुरुआत में, ये बंधुआ मजदूर प्लास्ज़ोव के श्रम शिविर में रहते थे और एमालिया में काम करने के लिए कई किलोमीटर यात्रा करते थे। बाद में उन्हें शिंडलर के कारखाने के कैंप में ही रहने के लिए जगह मिली।

प्लास्ज़ोव कमांडेंट एमॉन गोथ के साथ शिंडलर की मित्रता

प्लास्ज़ोव में कैदियों ने एसएस कमांडेंट एमॉन गोथ के कार्यकाल में गंभीर कठिनाइयों और हिंसा के यादृच्छिक कृत्यों का सामना किया। गोथ ने फरवरी 1943 से सितंबर 1944 तक प्लास्ज़ोव का संचालन किया। वह अपनी अति और परपीड़क यानी सैडिस्टिक क्रूरता के लिए कुख्यात था। वह अक्सर अपने विला की बालकनी से कैदियों पर गोली चलाता था। उसने कई मनमानी हत्याओं को भी अंजाम दिया। शिंडलर ने गोथ के साथ दोस्ती की और गोथ के विला में आयोजित शराब की पार्टियों में शामिल हुए। शिंडलर ने कमांडेंट से सहूलियतें पाने के लिए उसके साथ अपने निजी संबंध और रिश्वत का इस्तेमाल किया। इसने शिंडलर अपनी फैक्ट्री और सफलतापूर्वक चला पाए, साथ ही यहूदी कैदियों की मदद कर पाए।

एमालिया में शिंडलर का कैंप, 1943–1944

1943 में एक समय पर, शिंडलर ने गोथ को यहूदी बंधुआ मजदूरों को प्लास्ज़ोव के बाहर एमालिया के एक श्रमिक शिविर में पूरे समय रहने के लिए मना लिया। कैंप एमालिया फैक्ट्री परिसर के मैदान में स्थित था। कैंप में रहने वाले यहूदी बंधुआ मजदूर एमालिया और पास के तीन अन्य फैक्ट्री के लिए काम करते थे।

एमालिया कैंप की स्थिति प्लास्ज़ोव मुख्य कैंप की तुलना में बहुत बेहतर थी। शिंडलर और ऑस्ट्रियाई फैक्ट्री मालिक जूलियस मैड्रिट्स ने काले बाजार से कैदियों के लिए अतिरिक्त भोजन की व्यवस्था की।

जनवरी 1944 में, एसएस ने प्लास्ज़ोव का दर्जा बंधुआ मजदूर कैंप से बदलकर एकाग्रता कैंप कर दिया। एमालिया कैंप को आधिकारिक रूप से Jabłocie सबकैंप कहा जाता था। 1944 की गर्मियों में सबकैंप में लगभग 1,450 यहूदी कैदी थे।

1943 या 1944 में किसी समय, शिंडलर ने एमालिया में एक शस्त्र फैक्ट्री को जोड़ा। यहूदी कैदियों ने कारखाना बनाया, जो 1944 की गर्मियों के अंत में पूरा हुआ।

शिंडलर के एमालिया कैंप का अंत, गर्मी 1944

1944 की गर्मियों में, सोवियत सेना पोलैंड में आगे बढ़ी और क्राकोव की ओर बढ़ी। जर्मन अधिकारियों ने प्लास्ज़ोव और इसके उपशिविरों से कैदियों को निकालने की प्रक्रिया शुरू की, जिसमें एमलिया भी शामिल था। अधिकारियों ने जर्मन कब्जे वाले पोलैंड में शस्त्र फैक्ट्री को जर्मनी के अंदरूनी भाग में स्थानांतरित करने का भी आदेश दिया। इसमें एमालिया में शिंडलर की शस्त्र फैक्ट्री भी शामिल थी।

सैकड़ों यहूदी कैदियों को शिंडलर की सुरक्षा से हटा दिया गया था जब उन्हें एमालिया से वापस प्लास्ज़ोव भेज दिया गया। कई लोगों को तुरंत भीड़भाड़ वाले मालवाहक डिब्बों में रखा गया। उसके बाद उन्हें मौथौज़ेन एकाग्रता शिविर में स्थानांतरित कर दिया गया। कुछ कैदियों ने यह याद किया कि शिंडलर ने अंतिम क्षण में भी छोटे लेकिन सार्थक तरीकों से उनकी मदद करने की कोशिश की। उसने प्लास्ज़ोव में स्टेशन और मौथौसेन के रास्ते में कैदियों को पानी देने के लिए गोथ और एसएस गार्डों को रिश्वत दी। जैसे ही ट्रेन प्लास्ज़ोव से निकल गई, शिंडलर अब इन लोगों की मदद नहीं कर सकता था।

एमालिया में शिंडलर के प्रयास अब भी महत्वपूर्ण थे। शिंडलर ने यह सुनिश्चित किया था कि एमालिया के कैदियों को कारखाने में सुरक्षा और अपेक्षाकृत अच्छा भोजन मिलता रहे। इसका अर्थ यह था कि मौथौसेन की चरम परिस्थितियों में जीवित रहने का उनके पास बेहतर अवसर था। 

इस बिंदु पर, एमालिया में केवल लगभग 300 पुरुष यहूदी कैदी शिंडलर के साथ रह गए थे। उनका काम शिन्डलर को शस्त्र फैक्ट्री बंद करने और इसे किसी अन्य स्थान पर ले जाने की तैयारी करने में मदद करना था।

शस्त्र फैक्ट्री का ब्रुंनलिट्ज़ में स्थानांतरण, पतझड़ 1944

Construction of Oskar Schindler's armaments factory in Bruennlitz.

ब्रुनेलिट्ज़ में ऑस्कर शिंडलर के शस्त्र फैक्ट्री का कंस्ट्रक्शन। चेकोस्लोवाकिया, अक्टूबर 1944।

क्रेडिट:
  • US Holocaust Memorial Museum, courtesy of Leopold Page Photographic Collection

1944 की शरद ऋतु में, शिंडलर को अपने शस्त्र फैक्ट्री प्लांट को बोहेमिया और सुडेटेनलैंड के ब्रुनलिट्ज़ (ब्रनेक) शहर में स्थानांतरित करने की अनुमति प्राप्त हुई।

ब्रूनलिट्ज़ फैक्टरी कैंप ग्रॉस-रोज़न कॉन्सेंट्रेशन कैंप का एक उप-कैंप था। जर्मन अधिकारियों ने लगभग 1,000 यहूदी कैदियों को प्लास्ज़ोव से ब्रुनलिट्ज़ में शिंडलर के कारखाने में काम करने के लिए स्थानांतरित किया। इसमें 700 पुरुष और 300 महिलाएँ शामिल थीं। प्लास्ज़ोव के यहूदी कैदियों के लिए ब्रुनलिट्ज़ में स्थानांतरित होने का मतलब अधिक जीवित रहने की संभावना थी। अन्य एकाग्रता शिविरों में भेजे गए लोगों को अधिक विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

क्या ऑस्कर शिंडलर ने सूची बनाई?

ऑस्कर शिंडलर ने सूची तैयार नहीं की। "शिन्डलर्स लिस्ट" की अवधारणा होलोकॉस्ट के दौरान शिंडलर के बचाव प्रयासों के लिए एक संक्षिप्त संकेत है। अक्सर इसे शिंडलर द्वारा बचाए गए कैदियों की सूची के रूप में समझा जाता है। विशेष रूप से, यह अक्सर उन कैदियों के नामों से जुड़ा होता है जिन्हें प्लास्ज़ोव एकाग्रता शिविर से शिंडलर के ब्रुनलिट्ज़ कारखाने में स्थानांतरित किया गया था।

प्लास्ज़ोव से ब्रुनलिट्ज़ की केवल एक ही ट्रांसफ़र सूची नहीं थी। पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग सूचियाँ थीं। सूचियों के नाम कई बार बदल दिए गए। इसके अलावा, इन स्थानांतरण सूचियों को शिन्डलर ने नहीं लिखा था, और नामों पर अंतिम निर्णय शिन्डलर के पास नहीं था। सूचियाँ वास्तव में मार्सेल गोल्डबर्ग द्वारा तैयार की गई थीं। गोल्डबर्ग एक यहूदी कैदी अधिकारी थे जो प्लास्ज़ोव मुख्य शिविर में एसएस के लिए लिपिक के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने ब्रुनलिट्ज़ में शिंडलर के कारखाने में स्थानांतरित किए जाने वाले पुरुष और महिला कैदियों की अलग-अलग सूचियाँ तैयार कीं।

गोल्डबर्ग द्वारा संकलित सूचियों में शिंडलर और मैड्रिच के कारखानों के कुछ यहूदी श्रमिकों के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों का भी समावेश था। सूचियों में प्रमुख यहूदी कैदी अधिकारी और उनके परिवारों को भी शामिल किया गया। कुछ कैदियों ने गोल्डबर्ग को सूची में जोड़े जाने के लिए रिश्वत दी। अन्य लोग बस भाग्यशाली थे।

ज़्यादातर लोग जो प्लास्ज़ोव से ब्रुनलिट्ज़ में स्थानांतरित किए गए थे, उन्होंने एमालिया में ऑस्कर शिंडलर के लिए काम नहीं किया था। उस समय, शिंडलर अधिकांश लोगों को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे।

ब्रुनलिट्ज़ के लिए कैदियों का स्थानांतरण, पतझड़ 1944

प्लास्ज़ोव से ब्रुनलिट्ज़ तक कैदियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया अराजक थी। परिवहन के समय, कैदियों को अस्थायी रूप से शिंडलर की देखरेख से अलग किया गया, और वह उनकी रक्षा करने में असमर्थ रहे।

पुरुष कैदियों को ग्रॉस-रोसेन के माध्यम से ब्रुनलिट्ज़ में स्थानांतरित किया गया था। वे कुछ ही दिनों में ब्रुनलिट्ज़ पहुँचे। हालाँकि, महिलाओं को ऑशविट्ज़-बिर्केनाउ के माध्यम से स्थानांतरित किया गया था। उन्हें वहाँ तीन सप्ताह तक रखा गया था। महिला कैदियों के लिए ऑशविट्ज़-बिरकेनाऊ में बिताया गया समय भयावह, खतरनाक और अपमानजनक था। एक वृद्ध महिला कैदी टाइफस से संक्रमित हुई और उसका निधन हो गया। महिलाएं अंततः 1944 के मध्य नवंबर में ब्रुनलिट्ज शिविर में पहुंचीं। यह संभावना है कि शिंडलर ने एक संदेशवाहक के माध्यम से उनकी रिहाई सुनिश्चिति करने के लिए हस्तक्षेप किया। लोकप्रिय भ्रांति के विपरीत, वह स्वयं जाकर उपस्थित नहीं हुए।

ग्रॉस-रोसेन और ऑशविट्ज़ दोनों में, कुछ कैदियों को ब्रünलिट्ज़ ट्रांसपोर्ट सूची से हटा दिया गया और उनकी जगह अन्य कैदियों को लाया गया।

ब्रुनलिट्ज़ में शिंडलर के बचाव प्रयास

शिंडलर के सबसे महत्वपूर्ण बचाव प्रयास द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम हताश महीनों के दौरान ब्रून्नलिट्ज़ शिविर में हुए थे। अक्टूबर 1944 में शिविर की स्थापना से मई 1945 में इसकी मुक्ति तक, शिंडलर ने अपने यहूदी कैदियों को बचाने के लिए समर्पित कर दिया। यह एक कठिन और जोखिम भरा प्रयास था जिसके लिए उसे क्राकोव में कमाए गए अपने धन को खर्च करने की आवश्यकता थी।

एसएस से कैदियों की रक्षा करना

क्योंकि ब्रुनलिट्ज़ ग्रॉस-रोजेन का एक उपशिविर था, इसे एक एसएस कमांडेंट द्वारा संचालित किया गया और एसएस पुरुषों द्वारा संरक्षित किया गया। शिंडलर लगातार इस बात से भयभीत रहते थे कि एसएस कमांडेंट शिविर को समाप्त करने और यहूदी कैदियों की हत्या करने का निर्णय ले सकता है। यहूदी कैदियों को एसएस से बचाने के लिए, ऑस्कर और एमिली शिंडलर साइट पर स्थित एक अपार्टमेंट में रहते थे।

ब्रूनलिट्ज़ में भोजन और दवाएं प्राप्त करना

ब्रुनलिट्ज़ में, एमिली शिंडलर ने ऑस्कर को दुर्लभ खाद्य और चिकित्सा सामग्री प्राप्त करने में मदद की। शिंडलर ने अपनी आमदनी से इनका भुगतान किया। यह ऑस्कर के बचाव प्रयासों में एमिली की पहली बड़ी भूमिका थी। स्थानीय लोगों ने गुप्त रूप से कैदियों को भोजन पहुँचाने में मदद की।

यहूदियों को बचाने के लिए उत्पादन संख्या को गलत बताना

ब्रुनलिट्ज़ प्लांट को शस्त्र फैक्ट्री के रूप में वर्गीकृत किया गया था। यह इसके निरंतर अस्तित्व के लिए आवश्यक था। शिंडलर ने दावा किया कि कैदी जर्मन युद्ध प्रयास के लिए हथियारों का उत्पादन करने वाले कुशल श्रमिक थे। वास्तविकता में, हर कोई कारखाने में काम नहीं कर रहा था। जो लोग थे वे कुछ खास नहीं कर पाए। कुल मिलाकर, कारखाने ने केवल एक वैगन भर गोला-बारूद का उत्पादन किया।

यहूदी बंदियों इट्ज़ाक स्टर्न और मिएटेक पेम्पर की मदद से, शिंडलर ने नाजी जर्मन अधिकारियों को धोखा देने के लिए नकली उत्पादन आंकड़े तैयार किए। शिविर को बंद करने से एसएस को रोकने के लिए यह धोखा जरूरी था।

अन्य कैदियों की सहायता करना

जब अन्य कैदी उस क्षेत्र में पहुँचे, तो शिंडलर्स ने ब्रुनलिट्ज़ में उनकी देखभाल करने का निर्णय लिया। कुल मिलाकर, अन्य शिविरों से तीन कैदियों की परिवहन पहुंचे। शिंडलर्स उन्हें ब्रुनलिट्ज़ में ले आए, जहां उन्हें चिकित्सा देखभाल और भोजन मिला।

18 अप्रैल 1945 को, ब्रुनलिट्ज़ के लिए एक कैदी सूची में 1,098 नाम (801 पुरुष और 297 महिलाएं) दर्ज किए गए थे। इसमें प्लास्ज़ोव से स्थानांतरित किए गए यहूदियों के नाम और नए आगमन के नाम दोनों शामिल थे। इस सूची को कभी-कभी "Schindler’s List " भी माना जाता है।

मुक्ति

ब्रुनलिट्ज़ कैंप मई 1945 में मुक्त हो गया था। शिंडलर्स 9 मई, 1945 को ब्रुनलिट्ज़ से रवाना हुए, ठीक पहले जब सोवियत सैनिक शिविर में पहुंचे। उन्होंने सोवियत हाथों में पड़ने के डर से पश्चिम की ओर भागने की कोशिश की। उनके जाने से पहले, यहूदी कैदियों ने ऑस्कर को एक सोने की अंगूठी और एक हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र दिया, जो यह साबित करता है कि उन्होंने उनकी मदद के लिए प्रयास किए। शिंडलर्स अंततः मित्र देशों के कब्जे वाले जर्मनी के अमेरिकी क्षेत्र तक पहुँच गए।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शिंडलर का जीवन

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, शिंडलर और उनकी पत्नी चेकोस्लोवाकिया वापस नहीं लौट सके। जर्मन जासूस के रूप में उनकी युद्ध पूर्व की गतिविधियों ने उन्हें वहाँ एक युद्ध अपराधी बना दिया। उनकी जर्मन जातीय पृष्ठभूमि के कारण भी युद्ध के बाद के चेकोस्लोवाकिया में उनका स्वागत नहीं किया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, देश ने अपने जातीय जर्मन निवासियों को निष्कासित कर दिया।

शिंडलर्स कई वर्षों तक अमेरिकी कब्जे वाले क्षेत्र में जर्मनी के रेगेंसबर्ग शहर में रहे। वहाँ उन्होंने आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया। शिंडलर ने बार-बार अपने पूर्व यहूदी कैदियों और यहूदी सहायता संगठनों से मदद के लिए संपर्क किया। उसने यहूदियों को बचाने के लिए खर्च की गई धनराशि के लिए अमेरिकन यहूदी संयुक्त वितरण समिति (संयुक्त) से वित्तीय मुआवजे की मांग की। शिंडलर ने दावा किया कि उन्होंने 2.64 मिलियन राइखमार्क्स (उस समय लगभग एक मिलियन अमेरिकी डॉलर) खर्च किए थे। बाद में, उन्होंने अपने कारखाने के नुकसान के मुआवजे के लिए पश्चिम जर्मन सरकार को भी आवेदन दिया।

1949 में, ऑस्कर और एमिली अर्जेंटीना चले गए। वहाँ, ऑस्कर ने एक सफल व्यवसाय स्थापित करने की कोशिश की और असफल रहे। वह ऋण में फंस गया। 1957 में शिंडलर अकेले जर्मनी लौटे। वह एमिली से स्थायी रूप से अलग हो गया था, लेकिन उन्होंने तलाक नहीं लिया। शिंडलर का निधन अक्टूबर 1974 में जर्मनी में हुआ। उन्हें इस्राइल में दफनाया गया है।

कई यहूदी लोग जिनकी शिंडलर ने मदद की थी, युद्ध के बाद भी उनके प्रति समर्पित रहे। उन्हें अक्सर Schindlerjuden या शिंडलर यहूदियों के रूप में जाना जाता है।

शिंडलर को एक जाना-पहचाना नाम बनाना

ऑस्कर शिंडलर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रसिद्ध नहीं थे। युद्ध के बाद वह शिंडलर यहूदी प्रयासों के कारण एक प्रसिद्ध नाम बन गए।

1940 के दशक के आरंभ में, कुछ शिंडलर यहूदियों ने शिंडलर की कहानी को सार्वजनिक करना शुरू किया। बीसवीं सदी में, शिंडलर की कहानी समाचार पत्रों, पुस्तकों और फिल्मों में सामने आई। 1957 में, शिंडलर के एक निबंध को होलोकॉस्ट के दौरान बचावकर्ताओं पर एक जर्मन पुस्तक में शामिल किया गया था।

1993 की फिल्म Schindler’s List ने ऑस्कर शिंडलर को एक प्रसिद्ध नाम बना दिया। स्टीवन स्पीलबर्ग द्वारा निर्देशित, इस फिल्म ने लोकप्रियता और आलोचकों से प्रशंसा प्राप्त की। इसने 1994 के अकादमी पुरस्कारों में 'सर्वश्रेष्ठ फिल्म' सहित कुल सात ऑस्कर पुरस्कार जीते। स्पीलबर्ग की फिल्म मुख्य रूप से थॉमस केनेली द्वारा 1982 में प्रकाशित उपन्यास Schindler’s List (जिसका मूल शीर्षक Schindler’s Ark था) पर आधारित थी। केनेली ने लियोपोल्ड पेज के साथ नज़दीकी से काम किया, जो शिंडलर द्वारा बचाए गए यहूदी पुरुषों में से एक हैं।

उपन्यास और फिल्म ने अमेरिकी जनता को शिंडलर की कहानी से परिचित करवाया। हालाँकि, दोनों विवरणों में कुछ अशुद्धियाँ हैं।

शिंडलर के रूप में रक्षक

ऑस्कर शिंडलर की अनैतिकता और अवसरवाद ने उन्हें उनके यहूदी कैदियों का प्रभावी संरक्षक बना दिया। लेकिन यही गुण शिंडलर को कभी-कभी कम सम्मानजनक तरीकों से आचरण करने के लिए भी प्रेरित करते थे। इसकी वजह से, एक बचावकर्ता के रूप में उनकी स्थिति विवादास्पद रही है।

उदाहरण के लिए, 1960 के दशक में, यद वाशेम, जो इज़राइल की होलोकॉस्ट स्मारक की राष्ट्रीय संस्था है, द्वारा राष्ट्रों के बीच धर्मात्मा के रूप में उनका मनोनयन विवादास्पद था। कई शिंडलर यहूदियों ने उनके नामांकन का समर्थन किया। हालांकि, क्राकोव के दो यहूदी पुरुषों ने द्वितीय विश्व युद्ध के शुरुआती वर्षों के दौरान शिंडलर पर चोरी और दुर्व्यवहार का ठोस आरोप लगाया। इन आरोपों के बावजूद, याद वाशेम ने शिंडलर को उनके सम्मान में एक पेड़ लगाने के लिए आमंत्रित किया। उनका रोपण समारोह 8 मई 1962 को हुआ था।

1963 के अंत में, "राष्ट्रों के बीच धर्मी" का शीर्षक प्रदान करने वाली समिति ने शिंडलर को यह सम्मान औपचारिक रूप से नहीं देने का निर्णय लिया। 1993 में, याद वाशेम ने अपने पहले के फैसले को पलट दिया और ओसकर और एमिली शिंडलर दोनों को खिताब से सम्मानित किया।

ऑस्कर शिंडलर को होलोकॉस्ट के दौरान एक वीर बचावकर्ता के रूप में व्यापक रूप से याद किया जाता है। उसकी कहानी बचाव की जटिलताओं और चुनौतियों को उजागर करती है।

In Yad Vashem, the Israeli national institution of Holocaust commemoration, Oskar Schindler plants a tree in honor of his rescue ...

ऑस्कर शिंडलर ने याद वाशेम में राष्ट्रों के बीच धर्मी उपाधि के लोगों के एवेन्यू पर एक पेड़ लगाया। राष्ट्रों के बीच धर्मी वे गैर-यहूदी लोग हैं जिन्हें होलोकॉस्ट के दौरान खुद की जान जोखिम में डालकर यहूदियों की सहायता करने के लिए इजराइल के होलोकॉस्ट स्मारक, याद वाशेम द्वारा सम्मानित किया गया है।

क्रेडिट:
  • US Holocaust Memorial Museum, courtesy of Leopold Page Photographic Collection

फुटनोट

  1. Footnote reference1.

    1943 में, एमालिया के शिविर को कभी-कभी जुडेनलागर (यहूदी शिविर) या नेबेनलागर (सहायक शिविर) कहा जाता था। यह प्लास्ज़ोव के अधीनस्थ था।

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